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राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से जुड़कर ग्राम कंचरी के कृषक मनोज साहू ने रागी उत्पादन में रचा नया कीर्तिमान

बेमेतरा के ग्राम कंचरी के प्रगतिशील कृषक मनोज साहू ने परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए इस वर्ष एक अभिनव पहल की है। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत 0.5 हेक्टेयर भूमि में पहली बार रागी (मंडिया) की खेती कर क्षेत्र में एक सकारात्मक संदेश दिया है। यह प्रयास न केवल उनकी व्यक्तिगत उन्नति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि जिले के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है।

बीज उत्पादन कार्यक्रम से बढ़ा आत्मविश्वास और मिला तकनीकी मार्गदर्शन

साहू ने अपनी रागी फसल का पंजीयन बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य बीज निगम में कराया। इससे उन्हें कृषि विभाग एवं बीज निगम के विशेषज्ञों का नियमित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। फसल की बुवाई से लेकर कटाई तक वैज्ञानिक मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया। बीज उत्पादन के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों, खेत निरीक्षण, पृथक्करण दूरी तथा शुद्धता के नियमों का पालन करते हुए उन्होंने फसल की विशेष देखभाल की।

इस कार्यक्रम से जुड़ने के बाद उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों, उर्वरक प्रबंधन, जल प्रबंधन एवं रोग नियंत्रण के आधुनिक उपायों की जानकारी मिली, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने पूरी लगन के साथ खेती को अपनाया।

वैज्ञानिक पद्धति से खेती, बेहतर उत्पादन की उम्मीद

मनोज साहू ने पारंपरिक पद्धति के स्थान पर वैज्ञानिक तरीके अपनाए, जिनमें शामिल हैं, प्रमाणित एवं अनुशंसित उच्च गुणवत्ता वाले बीज का उपयोग, समय पर बुवाई एवं कतार पद्धति से रोपण, संतुलित एवं मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन, नियमित निराई-गुड़ाई एवं खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग नियंत्रण हेतु समुचित एवं समयबद्ध उपाय | इन तकनीकों को अपनाने से फसल की वृद्धि अत्यंत संतोषजनक रही है। खेत में फसल की स्थिति हरी-भरी एवं स्वस्थ दिखाई दे रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए अच्छी उपज प्राप्त होने की प्रबल संभावना है।

पोषण एवं बाजार दोनों दृष्टि से लाभकारी फसल

रागी (मंडिया) एक पोषक तत्वों से भरपूर मोटा अनाज है, जिसमें कैल्शियम, आयरन और फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। बदलती खानपान आदतों और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ने के कारण बाजार में इसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। ऐसे में रागी की खेती किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। चूंकि साहू की फसल बीज उत्पादन हेतु पंजीकृत है, इसलिए बीज निगम द्वारा सामान्य बाजार मूल्य की तुलना में अधिक दर मिलने की संभावना है। इससे उन्हें अतिरिक्त लाभ प्राप्त होगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। साथ ही, भविष्य में वे रागी की खेती का रकबा बढ़ाने की योजना भी बना रहे हैं।

अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण

शासन की योजनाओं का लाभ लेकर नई एवं वैकल्पिक फसलों को अपनाएं और वैज्ञानिक पद्धति से खेती करें, तो वे कम लागत में अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं। उनका यह प्रयोग ग्राम कंचरी सहित पूरे जिला बेमेतरा के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में सामने आया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी उनके प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के नवाचार से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि पोषण सुरक्षा एवं फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत रागी उत्पादन एवं बीज उत्पादन कार्यक्रम से जुड़कर वैज्ञानिक सोच और शासकीय योजनाओं का समुचित उपयोग किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम है। उनकी सफलता निश्चित ही जिले में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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