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शराब माफिया हुए हाईटेक: सरकारी बिजली खंभे को बनाया वाच  टावर

मामला लोलेसरा मेला स्थल के पास शराब व गांजा  की अवैध बिक्री का

माफिया ने सरकारी बिजली खम्भो में किए कैमरे  इंस्टॉल

आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवालअधिकारी नहीं करते कॉल रिसीव

 

बेमेतरा – लोलेसरा मेला स्थल के पास माफिया शराब व गांजा  की शातिराना अंदाज में बिक्री कर रहा हैं। आलम यह है कि शराब माफिया ने मार्ग से आने जाने वाले लोगों की निगरानी के लिए सरकारी खम्भो में कैमरे इंस्टॉल किए है। यहां पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए यह तरकीब को अपनाया गया है। उल्लेखनीय है कि कबीर पंथियों की आस्था का केंद्र लोलेसरा मेला स्थल से  करीब  50 मीटर  की दूरी पर  बड़े पैमाने पर शराब व गांजा  की अवैध बिक्री हो रही है। इस संबंध मे पत्रिका में प्रमुखता से खबर प्रकाशन के पश्चात् पुलिस ने कार्रवाई कर शराब जब्ती बनाई थी।

 

*आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में*

 

शराब की अवैध बिक्री के खिलाफ कार्रवाई के मामले मे आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे मे है। बीते माह लोलेसरा मेला स्थल के पास शराब. की अवैध बिक्री का मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 24 पौवा शराब जब्त  किया था, लेकिन मामला संज्ञान में होने के बावजूद आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। यहां  आबकारी विभाग सारा मामला पुलिस पर डालकर पल्ला झाड़ने में लगा रहता है।

 

पुलिस की दबिश को मात देने का प्लान

 

पुलिस जब भी किसी गांव में छापेमारी के लिए जाती है तो उसकी सफलता अचानक  पहुंचने पर टिकी होती है। अगर अपराधियों को पुलिस के आने की भनक लग जाए तो पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है। लोलेसरा में लगे ये कैमरे पुलिस के इसी हथियार को धारहीन कर रहे हैं। यहां माफिया घर के अंदर बैठकर सड़क की हर गतिविधि देखते रहते हैं। पहले पुलिस को गांव के मुखबिरों से जानकारी मिलती थी, लेकिन अब माफियाओं ने अपना खुद का डिजिटल मुखबिर (कैमरा) तैयार कर लिया है। इन कैमरों के जरिए आरोपी यह भी देखते हैं कि गांव का कौन सा व्यक्ति पुलिस की गाड़ी के साथ दिख रहा है या उनकी शिकायत कर रहा है।

 

सरकारी खंभो पर माफिया की तीसरी आंख

आमतौर पर सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल यहाँ अपराध को संरक्षण देने के लिए किया जा रहा है। लेकिन ग्राम लोलेसरा में इस हाईटेक तरीके ने सबको चौंका दिया है। इससे न केवल अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, बल्कि आम लोगों की निजता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार शराब माफिया ने सड़क किनारे स्थित सरकारी खंभे का उपयोग अपने निजी सर्विलांस सिस्टम के लिए किया। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिस की टीम या किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर घर के भीतर बैठकर नजर रखना था ताकि छापा पड़ने से पहले ही शराब और आरोपी मौके से फरार हो सकें।

माफिया परिवार का हर सदस्य नशे के कारोबार मे  लिप्त

नशे के इस अवैध कारोबार में माफिया का पूरा परिवार संलिप्त है, जिसमें हर सदस्य की भूमिका तय है। यहां एक सदस्य मार्ग से गुजरने वाले लोगों की निगरानी करता है तों  दूसरा सदस्य केले के खेत में छिपाए हुए शराब का परिवहन करता है, वही तीसरा सदस्य शराब की बिक्री करता है। इसके अलावा परिवार की महिलाओं की भी भूमिका तय है।

 

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