डीएम फंड में गड़बड़ी: कागजों में भौतिक सत्यापन व मूल्यांकन, 19 मे सें 8 बोर व टंकी मिले मिसिंग

सार्वजनिक स्थान पर स्वीकृत बोर को निजी व्यक्ति के खेत में किया
बेमेतरा – शहरी क्षेत्र में डीएम फंड से हुए बोर खनन सह टंकी स्थापना मे बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। यहां स्वीकृत 19 बोर खनन सह टंकी स्थापना में से 8 कार्यों का कागजों में भौतिक सत्यापन व मूल्यांकन करने का मामला सामने आया है। उल्लेखनीय है कि पार्षदों को डीएमएफ के अंतर्गत हुए इस कार्य को विधायक निधि से होना बताया गया। मामला उजागर होने के बाद पार्षदों को डीएमएफ सें बोर खनन सह टंकी स्थापना की जानकारी हुई। आरटीआई से मिली जानकारी के बाद निष्पक्ष न्यूज़ की पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए। एक ओर स्वीकृत बोर खनन सह टंकी स्थापना में कई कार्य मिसिंग एवं एक बोर को निजी खेत में होना पाया गया।
कई पार्षदों ने बताया कि उनकी जानकारी के बिना वार्डो में बोर खनन सह टंकी की स्थापना की गई है। वही पार्षदों को स्वीकृत कार्यों की सूची भी नहीं सौंपी गई थी, नतीजतन वार्ड पार्षद इस गड़बड़ी से अनभिज्ञ है। इस मामले में ठेकेदार, इंजीनियर एवं एसडीओ की संलिप्तता उजागर हुई है। पक्ष जानने बेमेतरा एसडीओ को फोन कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। वहीं फील्ड इंजीनियर ने वर्सन के लिए अधिकृत नहीं होना बताया। ठेकेदार के अनुसार विभाग की ओर से बताए गए स्थान पर बोर खनन के साथ पानी टंकी की स्थापना की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार सभी बोर खनन सह टंकी स्थापना के कार्य स्वीकृत राशि से 4 से 6% अधिक दर में दिए गए हैं। प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि 2 लाख 27 हजार रुपए है। स्पष्ट है कि सिंडिकेट बनाकर कार्य का ठेका मनमुताबिक ठेकेदार को दिया गया है। यहां हर स्तर पर कमीशनखोरी हुई है, नतीजतन कार्यों में बड़ी गड़बड़ियों को अंजाम दिया गया ।
डीएमएफ को विधायक निधि का कार्य बताया
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी विडंबना यह रही कि वार्ड के पार्षदों को अब तक यह बताया गया था कि बोर खनन और टंकी स्थापना के कार्य विधायक निधि से कराए जा रहे हैं। पार्षदों ने इसी विश्वास में कार्यों की निगरानी नहीं की। अब आरटीआई के दस्तावेज सामने आए तो पता चला कि ये तमाम कार्य डीएमएफ मद से स्वीकृत थे। पार्षदों को जानबूझकर स्वीकृत कार्यों की सूची नहीं सौंपी गई, ताकि वे कार्यस्थल और गुणवत्ता की जांच न कर सकें।
डीएमएफ के कार्यों में नहीं लगाई जा रहे सूचना पटल
निष्पक्ष न्यूज़ की पड़ताल में डीएमएफ के अंतर्गत स्वीकृत लगभग सभी कार्यों के कार्य स्थल पर सूचना पटल नहीं मिले। गौरतलब हो की सूचना पटल में मद, कार्य, ठेकेदार का नाम, लागत, कार्य शुरू दिनांक, कार्य पूर्णता दिनांक, विभाग का नाम एवं संबंधित विभाग के अधिकारी का नाम व मोबाइल नंबर अंकित रहता है। यह जानकारी आमजनों के लिए सूचना पटल पर दर्शाई जाती है। ताकि आमजन किसी भी प्रकार की गड़बड़ी व कमियों की जानकारी संबंधित विभाग के अधिकारी को दे सके, लेकिन यहां गंभीर बात यह है कि जानबूझकर सूचना पटल नहीं लगाए जा रहे हैं।
वार्ड के बोर की स्थापना निजी व्यक्ति के खेत में
निष्पक्ष न्यूज़ द्वारा की गई पड़ताल में ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो विभाग के दावों की पोल खोलते हैं। शहर के विभिन्न वार्डों में बोर खनन और पानी टंकी की स्थापना की जानी थी। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट मिली। कई वार्डों में कागजों पर बोर खनन और टंकी स्थापना पूर्ण दिखाई गई है, लेकिन मौके पर ऐसी कोई संरचना मौजूद ही नहीं है। सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब एक सरकारी बोर को वार्ड के सार्वजनिक स्थान के बजाए दिनेश नाम के व्यक्ति के खेत में स्थापित पाया गया। यह जांच का विषय है कि किसी निजी व्यक्ति के खेत में बोर खनन किसके कहने पर किया गया।
इन वार्डो में डीएमएफ के अंतर्गत स्वीकृत हुए बोर सह टंकी
डीएमएफ के अंतर्गत वार्ड 15 में 3 बोर, वार्ड क्रमांक 1 में 1 बोर, वार्ड 13 में 3 बोर, वार्ड 2 में 2 बोर, वार्ड 7 में 1 बोर, वार्ड 12 मे 1 बोर, वार्ड 5 मे 1, वार्ड 3 मे 3 बोर, वार्ड 14 मे 1 बोर, वार्ड 16 मे 1 बोर, जिला साहू संघ के पास 1 बोर, एवं वार्ड 19 मे 1 बोर कुल 19 बोर होना था
कागजों पर भौतिक सत्यापन व मूल्यांकन
कार्यों का भौतिक सत्यापन एवं मूल्यांकन विभाग के फिल्ड इंजीनियर व एसडीओ के द्वारा किया जाता है। यहां शहर में हुए बोर खनन सह टंकी स्थापना मे कागजों में भौतिक सत्यापन व मूल्यांकन कर दिया गया। इस संबंध में इंजीनियर से पूछने पर मामले से पल्ला झाड़ते हुए, एसडीओ से जानकारी लेने की बात कही।





