इलाज के नाम पर खेल: नेत्र सहायक पर लापरवाही व मरीजों को निजी अस्पताल भेजने के लगे आरोप

शिकायतकर्ता ने कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को लिखा शिकायती पत्र
बेमेतरा – सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज के दावों के बीच जिला अस्पताल के आई वार्ड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ इलाज के लिए आने वाले मरीजों के प्रति न केवल संवेदनशीलता की कमी देखी जा रही है, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठकर निजी क्लीनिकों को फायदा पहुँचाने का खेल भी धड़ल्ले से चल रहा है। मामला जिला अस्पताल में पदस्थ सहायक नेत्र अधिकारी विद्यासागर का मरीज को गुमराह कर निजी आई हॉस्पिटल भेजने का है। इस मामले में गेस्ट प्रोफेसर पीजी कॉलेज डॉ. डोशन साहू ने बताया कि बीते दिनों आंख के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचा था। यहां मोटरसाइकिल चलाने के दौरान आंख में कंकड़ पड़ने से दर्द के इलाज के लिए पहुंचा था। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को शिकायती पत्र लिखा है इसकी प्रतिलिपि सिविल सर्जन बेमेतरा को सौंपी जाएगी।
घंटे भर विलंब से पहुंचे अस्पताल
इस संबंध में नेत्र सहायक अधिकारी का पक्ष जानने जिला अस्पताल शाम करीब 5:55 बजे पर जिला अस्पताल पहुंचने पर उपस्थित नहीं मिले। इसके बाद मौके से फोन पर संपर्क करने पर उन्होंने अस्पताल में रहने की बात कही जबकि वह 10 मिनट बाद पीछे के दरवाजे से अस्पताल पहुंचे। जबकि ड्यूटी समय शाम 5 से 7 बजे तक है। यहां नेत्र सहायक ने अपना कोई भी पक्ष देने से इनकार कर दिया और अपने उच्च अधिकारी से बात करने कहा।
निजी ऑप्टिकल एवं मेडिकल में जाने की देते हैं सलाह
नेत्र सहायक विद्यासागर पर केवल मरीजों को गुमराह करने का ही नहीं, बल्कि सरकारी समय के दौरान या उसके बाद निजी ऑप्टिकल, मेडिकल दुकानों में जाने की सलाह देते हैं। शिकायत के मुताबिक, जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को अक्सर निजी सेंटरों पर जाने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग रहा है।
मोबाइल पर बात करते हुए की जांच
शिकायतकर्ता डॉ. डोशन साहू ने बताया कि वे अपनी आंखों की समस्या के इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुँचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ड्यूटी पर तैनात नेत्र सहायक विद्यासागर ने उनके इलाज में भारी लापरवाही बरती। डॉ. साहू के अनुसार, नेत्र सहायक मोबाइल पर बात करने में व्यस्त थे, इसी दौरान उन्होंने बात करते-करते ही प्राथमिक जांच की ।
गुमराह कर निजी अस्पताल जाने की दी सलाह
हद तो तब हो गई जब काफी देर इंतजार कराने के बाद नेत्र सहायक ने डॉ. साहू से कहा कि आपकी आंख के पीछे बाल उग आया है, मैंने 10 साल में ऐसा प्रकरण पहली बार देखा है। इसके बाद सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का लाभ देने के बजाय, उन्हें परशुराम चौक मार्ग स्थित निजी अस्पताल जाने की सलाह दी।
निजी अस्पताल जाने की दी जाती है सलाह
जिला अस्पताल में दूर-दराज से ग्रामीण इस उम्मीद में आते हैं कि उन्हें मुफ्त और बेहतर इलाज मिलेगा। लेकिन यदि जिम्मेदार कर्मचारी ही उन्हें निजी अस्पतालों का रास्ता दिखाने लगें, तो गरीब जनता कहाँ जाएगी। इस मामले में अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन दोषी कर्मचारी के खिलाफ क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है।
इस संबंध में शिकायत अप्राप्त है, शिकायत मिलने पर जांच की जाएगी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की।
लोकेश साहू-सिविल सर्जन जिला अस्पताल बेमेतरा








