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जमीन की नई गाइडलाइन से जनता में मायूसी, राहत की उम्मीदों पर फिरा पानी  रजिस्ट्री का खर्च बढ़ाने के साथ रियल एस्टेट कारोबार पर पड़ेगा बुरा प्रभाव 

बेमेतरा – जिले मे जमीन की दरों के लिए वर्ष 2025-26 की नई कलेक्टर गाइडलाइन जारी कर दी गई है। नई गाइड लाइन से आम जनों को राहत की उम्मीद थी लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 की पुरानी गाइडलाइन में वर्ष 2019-20 की तुलना में 200 से 300% की बढ़ोतरी की गई थी। इस बढ़ोतरी से बिल्डर लॉबी, कृषक व आम जनों में काफी असंतोष पैदा हुआ। संयुक्त तेज विरोध के बाद राज्य सरकार ने दरों के पुनः निर्धारण का निर्णय लिया। इसके लिए 31 दिसंबर 2025 तक दावा आपत्ति मंगाई गई, लेकिन इन दावा आपत्तियों पर कोई अमल नहीं किया गया है। 2025-26 की पुरानी दरों की तुलना में नई दरों में वृद्धि की गई है, जो सभी वर्गों के लिए निराशाजनक है।

           बढ़ती कीमतें, घटती राहत

जिले के कई शहरी और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 10% से 25% तक की वृद्धि देखी गई है। ग्रामीण इलाकों में भी मुख्य मार्ग से लगी जमीनों के दाम आसमान छू रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई इलाकों में सरकारी गाइडलाइन दर, वास्तविक बाजार मूल्य से भी अधिक हो गई है। इससे जमीन की खरीदी-बिक्री में भारी परेशानी आ रही है।

     बेमेतरा तहसील की दरों में बेतहासा वृद्धि

जिला मुख्यालय समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन की दरों में बेतहासा वृद्धि हुई है। इसके विपरीत बेरला, साजा, थानखम्हरिया और नवागढ़ में दरों में कमी या स्थिरता देखी गई है। वहीं बेमेतरा शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में गाइडलाइन दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। वही आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह वृद्धि 200% से अधिक पहुंच गई है।

            राहत के नाम पर खानापूर्ति

बेमेतरा तहसील के अंतर्गत लगभग 84 ग्राम आते हैं, लेकिन पंजीयन व्यवस्था के अनुसार कुल 120 गांवों का केंद्र बेमेतरा ही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन 120 गांवों में से केवल 10% इलाकों में मामूली राहत दी गई है, जबकि शेष 90% क्षेत्र भारी भरकम सरकारी दरों की मार झेल रहे हैं।

           रजिस्ट्री खर्च का बढ़ता बोझ

गाइडलाइन दरों में इस बेतहाशा वृद्धि का सीधा असर रजिस्ट्री शुल्क पर पड़ा है। जमीन की कीमत बढ़ने से स्टांप ड्यूटी और अन्य पंजीयन शुल्क भी कई गुना बढ़ गए हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब बेमेतरा में खुद का आशियाना बनाना या जमीन खरीदना एक सपना होता जा रहा है।

      खेती की जमीन भी नहीं रही अछूती

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। ग्राम भोईनाभाठा और उसके आसपास के गांवों में सड़क से 7-10 खेत अंदर (भीतरी इलाकों) की जमीन की दर भी 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तय कर दी गई है। स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह दरें जमीनी हकीकत से कोसों दूर और पूरी तरह अव्यवहारिक हैं। लगभग सभी ग्रामीण क्षेत्र का यही हाल है।

             निष्कर्ष और प्रभाव

इस नई गाइडलाइन के लागू होने से बेमेतरा जिले में आने वाले दिनों में रजिस्ट्री की संख्या में गिरावट आने की आशंका है। साथ ही, इससे निर्माण कार्यों की लागत भी बढ़ेगी। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर अब जनता का दबाव बढ़ रहा है कि वे इस मामले में शासन स्तर पर हस्तक्षेप करें और दरों का पुनर्निर्धारण कराएं।

         व्यावहारिकता पर उठे सवाल

लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि बेमेतरा के उन क्षेत्रों में दरें कम की जाएं जहां विकास कार्य धीमे हैं या जहां जमीन की वास्तविक कीमत सरकारी दर से कम है। व्यापारियों और किसानों का कहना है कि प्रशासन ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए केवल राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से ये दरें तय की हैं।

हमें उम्मीद थी कि इस बार सरकार कम से कम 15-20% की रियायत देगी ताकि ठप पड़े रियल एस्टेट कारोबार को गति मिल सके, लेकिन इसके उलट दरों में वृद्धि कर दी गई है।

इस तरह समझे जमीन के दरों में बढ़ोतरी  क्षेत्र/लोकेशन का प्रकार दर प्रति वर्ग मीटर सन 2025-26 पुराना/नया, मुख्य मार्ग से 20 मीटर तक

1. शहीद हेमू कलाणी वार्ड = 11400-22500,

2. शहीद हेमू कलाणी वार्ड = 25200-38000

3. रानी लक्ष्मी बाई वार्ड = 37200-58000

4. बाबा रामदेव वार्ड = 37200-84000

5. मस्जिद वार्ड = 0-88000

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