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5.25 लाख का जुर्माना भी बेअसर ढोकला ईंट भट्ठे के खिलाफ अब एनजीटी भोपाल में शिकायत जल संसाधन विभाग का तीसरा नोटिस, जलाशय के बांधा पार का व्यावसायिक इस्तेमाल बेमेतरा

दो बार पेनल्टी लगने के बाद भी ढोकला ईट भट्ठा संचालक ने ईट का निर्माण बदस्तूर जारी रखा है। उल्लेखनीय है कि बिना अनुमति आईटी निर्माण के लिए भट्ठा संचालक पर खनिज विभाग की ओर से दो बार 50 हजार एवं 4 लाख 75 हजार रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। यहां एनजीटी की नियमों को ताक पर रखकर संचालक ने भट्ठा संचालन की तैयारी कर ली है। निष्पक्ष न्यूज़ में लगातार खबर प्रशासन के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच टीम गठित की गई। जांच में बिना अनुमति ईट निर्माण पाए जाने की पुष्टि हुई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम ढोकला में स्थित यह ईंट भट्ठा पिछले 6 महीनों से बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि नियमों के उल्लंघन के बावजूद पर्यावरण विभाग ने संबंधित संचालक को सीटीओ जारी कर दिया है।

आवेदक ने एनजीटी भोपाल में की शिकायत

​स्थानीय स्तर पर उचित कार्रवाई नही होने और जांच में विसंगतियों को देखते हुए, आवेदक ने अब एनजीटी भोपाल का दरवाजा खटखटाया है। स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजी गई इस शिकायत में मांग की गई है कि भट्ठे के संचालन की फिर से जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालक के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई कर भट्ठे को तत्काल बंद कराया जाए।

एनजीटी नियमों का खुला उल्लंघन

​आवेदक का कहना है कि प्रशासन की नाक के नीचे नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है, जिससे भविष्य में पर्यावरण और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि ईट भट्ठा के कार्य क्षेत्र से ओपन जेल की दूरी महज 100 मीटर है, वही सबसे आवश्यक वृक्षारोपण की ओर भी ध्यान नहीं दिया गया।

एरिगेशन से संचालक को तीसरा नोटिस जारी

जल संसाधन विभाग की ओर से ईट भट्ठा संचालक को दो बार नोटिस जारी कर कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब हो कि विभाग के बांधा जलाशय के पार को व्यावसायिक प्रयोजन के लिए उपयोग किया जा रहा है। यहां जलाशय के पार को सड़क के रूप में उपयोग करते हुए ईट भट्ठा से भारी वाहनों की आवाजाही की जा रही है। इस संबंध में सूचना मिलने पर विभाग की जांच में शिकायत सही मिली इसके बाद संचालक को नोटिस जारी किया गया। लेकिन दो बार नोटिस जारी करने के बावजूद संचालक कार्यालय में उपस्थित नहीं हुआ है, इसलिए विभाग की ओर से फिर से तीसरी बार संचालक को नोटिस जारी किया जाएगा, उपस्थित नहीं होने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पंचनामा प्रतिवेदन में दूरी पर खेल

शिकायतकर्ता के अनुसार जांच के दौरान रेवेन्यू, खनिज एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में ओपन जेल से चिमनी की दूरी की नाप जोख नहीं की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ओपन जेल से चिमनी की दूरी लगभग 350 मीटर है, लेकिन पंचनामा प्रतिवेदन में 500 मीटर दर्शाई गई है। यहां पंचनामा रिपोर्ट में लीपा पोती कर प्रतिवेदन तैयार किया गया।

नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप

​शिकायतकर्ता ने आवेदन में कई चौंकाने वाले बिंदुओं का उल्लेख किया है, जो पर्यावरण और सुरक्षा मानकों के सीधे उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं

1. ​जेल से कम दूरी: बताया गया है कि ईंट भट्टे के कार्यक्षेत्र की दूरी ओपन जेल से मात्र 100 मीटर है, जबकि चिमनी की दूरी केवल 350 मीटर है।

2.​ अवैध विस्तार: आवेदन के अनुसार, केवल 2 हेक्टेयर (5 एकड़) की एनओसी ली गई है, जबकि ईंट भट्टे का विस्तार 17 एकड़ के विशाल क्षेत्र में कर दिया गया है।

3. ​बिना अनुमति निर्माण: आरोप है कि सीटीओ मिलने से पहले ही लाखों ईंटों का निर्माण कर लिया गया।

4. ​भूमि परिवर्तन का अभाव: कृषि भूमि का व्यवसायिक उपयोग करने के लिए आवश्यक भूमि डायवर्सन (व्यपवर्तन) भी नहीं कराया गया है।

5. ​पर्यावरण मानकों की अनदेखी:
6. नियमों के अनुसार ईंट भट्टे के चारों ओर तीन लेयर में वृक्षारोपण अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं किया गया है।

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