जल जीवन मिशन पर 80 लाख खर्च, फिर भी बूंद बूंद पानी को तरसे जेवरा के ग्रामीण

विभाग के दावों की खुली पोल, कागजों में कार्य पूर्ण, पर ग्रामीणों को पानी नसीब नहीं
गांव में 10 बोर पंप में से 9 बंद, सिर्फ 1 पंप से हो रही जलापूर्ति
बेमेतरा – केंद्र सरकार क़ी महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अधिकारियों व ठेकेदारों की लापरवाही व कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई। मामला ग्राम पंचायत जेवरा का है, यहां कार्य पूर्ण होने के करीब ढाई साल बाद भी ग्रामीणो को एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हो रहा है। योजना अंतर्गत 80 लाख की लागत से ग्राम जेवरा में यूपीवीसी पाईप लाईन, घरेलु कनेक्शन एवं पानी टंकी का निर्माण हुआ है। बावजूद वर्तमान स्थिति दुर्भाग्यपूर्ण है, योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार वर्क आर्डर 2022 का है। वही कार्यपूर्णता दिनांक व योजना हस्तांतरण दिनांक को सूचना पटल पर अंकित नहीं किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार पानी टंकी निर्माण, पाइपलाइन का विस्तार, नल कनेक्शन कार्य पूर्ण हो चुके हैं। बावजूद जिला पूर्ति शुरू करने को लेकर जिम्मेदार अधिकारी व ठेकेदार सुध लेने को तैयार नहीं है।
ग्रामीणों ने योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठाए हैं, ओवरहेड टैंक बस्ती से काफी दूर बनाया गया है, जहाँ बोर पंप में पर्याप्त जलस्रोत भी नहीं है। पाइपलाइन विस्तार में भारी अनियमितता बरती गई है। कई वार्डो मे नई पाइपलाइन का विस्तार नहीं किया गया है, वहीं कई स्थानों पर पुरानी योजना के पाइप लाइन को नई योजना की पाइपलाइन से जोड़ दिया गया है। स्विच रूम और अन्य ढाँचे देखरेख के अभाव में खंडहर जैसे नजर आने लगे हैं।
स्थानीय भाजपा नेता प्रबल सिंह ने बताया कि गांव में जल संकट लगातार बना रहता है, जो गर्मी के दिनों में विकराल रूप ले लेता है। यदि योजना समय पर पूरी होती, तो आज गांव को इस समस्या से मुक्ति मिल जाती। उन्होंने वर्तमान शासन से मामले को संज्ञान में लेकर दोषियों पर कार्रवाई और कार्य को गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूर्ण कराने की मांग की है। वहीं ग्राम पंचायत जेवरा के सरपंच महेंद्र पाटिल ने कहा कि योजना का कार्य लंबे समय से बंद है। हमने पीएचई विभाग के जिला कार्यालय और कलेक्टर को भी लिखित में अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों की शिकायत पर पड़ताल पर पहुंची निष्पक्ष न्यूज़ के टीम के समक्ष गांव की महिलाओं ने जमकर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को पानी नहीं मिलने से योजना के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं, योजना अंतर्गत ग्रामीणो को घर पहुंच पानी की सुविधा मिलनी चाहिए। गांव की आबादी 2 हजार से अधिक है, लगभग 70 से 75 प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन किए गए हैं, जो जलापूर्ति नहीं होने से शोपीस बने हुए हैं।
जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुँचाना है, जेवरा गांव में दम तोड़ती नजर आ रही है। गांव में नल तो लगा दिए गए हैं, लेकिन उनमें पानी नही आने से ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि नलों में पानी नहीं आ रहा है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि घर की महिला, बच्चे एवं बुजुर्गों को सुबह 4 बजे से ही निजी पंपों पर पानी भरने के लिए लंबी लाइन लगानी पडती है।
ग्रामीण गंगा चतुर्वेदी, मुन्नी बंजारे, राजकुमारी बंजारे, स्वाति चतुर्वेदी ने बताया कि गांव में हैंड पंप व बोर पंप मिलाकर कुल 10 पंप है, इनमें से 9 पंप बंद पड़े हैं। वही एक पंप से जलापूर्ति हो रही है। नेशनल हाईवे 30 पर सड़क के दोनों ओर गांव बसा हुआ है। वर्तमान में पेयजल के लिए सड़क को पार कर दूसरी ओर जाना पड़ता है, सुबह 4 बजे अंधेरा होता है। यहां भारी वाहनों की आवाजाही लगी रहती है, सड़क हादसे की संभावना रहती है, जान जोखिम में डालकर पानी भरने जाना पड़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति,
केंद्र सरकार की जल जीवन मिशन योजना के अंतर्गत शामिल लगभग हर गांव में ग्रामीणों को पानी नहीं मिलने की शिकायत मिल रही है। कुछ गांव के ग्रामीण सौभाग्यशाली हैं। जहां नाम मात्र पानी मिल पा रहा है। ग्राम झाल, लोलेसरा, राजकुड़ी अमोरा, करचुआ, कंतेली, हथमुड़ी, डुंडा, रांका समेत दर्जनभर गांव में निष्पक्ष न्यूज़ के टीम के पड़ताल में ग्रामीणों को पानी नहीं मिलने की शिकायत है। ऐसी स्थिति में विभाग की ओर से तैयार किए डीपीआर पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यहां ठेकेदार कार्य पूर्णता का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी को पूरा मान ले रहे हैं।








