
बेमेतरा – स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदों में भर्ती के लिए अनुभव प्रमाण पत्र लेने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय पहुंचे, कोरोना वॉरियर्स को 16 घंटे इंतजार करना पड़ा। विभाग की बदइंतजामी का आलम यह है कि कार्यालयीन समय सुबह 10:30 बजे सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे दर्जन भर अभ्यर्थियों को देर रात 1:45 बजे तक रोक कर रखा गया। तरह-तरह के बहाने कर इन अभ्यर्थियों को सीएमएचओ कार्यालय व जिला अस्पताल के चक्कर कटवाए गए। स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न पदों की भर्ती के लिए बीते साल व्यापम द्वारा भर्ती परीक्षा ली गई थी। कुल 525 पदो की सीधी भर्ती में स्टाफ नर्स, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक महिला/पुरुष, वार्ड बॉय आदि पद शामिल है।
कोरोना काल मे सेवा दिए अभ्यर्थी को 10 अंक बोनस मिलेगा
संबंधित अभ्यर्थियों से सेवा प्रदाय सरकारी संस्थानों से अनुभव प्रमाण पत्र मांगे गए हैं। संचनालय स्वास्थ्य सेवाएं से जारी निर्देश के अनुसार कोरोना काल के दौरान शासकीय संस्थानों में नियुक्त एक वर्ष में 6 माह कार्य का प्रमाण पत्र, व्यापम द्वारा आयोजित परीक्षा में सम्मिलित अभ्यर्थियों को 15 दिवस के भीतर संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आवेदन कर अनुभव प्रमाण पत्र प्राप्त करना है। इसके पश्चात अनुभव प्रमाण पत्र, पेय स्लीप, कोविड -19 ज्वाइनिंग लेटर को स्पीड पोस्ट के माध्यम से 29 जनवरी तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को प्रेषित करना है। इनमें कोरोना काल में सरकारी संस्थानों में सेवा दिए अभ्यर्थियों के लिए 10 अंक बोनस दिया जाना है।
अभ्यर्थियों ने दुर्गा प्रसाद सेन टीम का जताया आभार
इस संबंध में दुर्गा प्रसाद सेन को सूचना मिलने पर कार्यालयीन समय के बाद शाम करीब 6 बजे सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे। यहां अभ्यर्थी अनुभव प्रमाण पत्र नहीं मिलने को लेकर काफी आक्रोशित दिखे और अनुभव प्रमाण पत्र लिए बिना कार्यालय से नहीं हटने को लेकर अड़ गए। इस संबंध में जिला कार्यालय से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा था। रात 1:45 बजे तक अभ्यर्थियों को अनुभव प्रमाण पत्र मिलने तक दुर्गा प्रसाद सेन ने डटे रहे टीम कार्यालय में डटी रही इसके लिए अभ्यर्थियों ने टीम का आभार जताया।
प्रक्रिया के नाम पर 16 घंटे रोका गया
अभ्यर्थी संजय चंद्राकर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न पदों में भर्ती के लिए व्यापम परीक्षा आयोजित हुई, इसमें अनुभव प्रमाण पत्र मांगा गया है। इसके लिए मंगलवार सुबह 10:30 बजे सीएमएचओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन रात 1:45 तक रोका गया। 29 जनवरी तक अनुभव प्रमाण पत्र स्पीड पोस्ट के माध्यम से सीएमएचओ कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है, 28 तारीख रात्रि तक सभी अभ्यर्थियों को रोक के रखा गया। जो कार्य कार्यालयीन समय में संपादित होना था उसे प्रक्रिया के नाम पर देर रात तक रोका गया, जो दुर्भाग्यजनक है।
कोरोना काल में सेवा का प्रतिफल विभाग की बेपरवाही से मिला
अभ्यर्थियों ने भावुक होकर कहा कि कोरोना काल में अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को सेवा दी, उसका प्रतिफल हमें अपने ही विभाग के बेपरवाह अंदाज के रूप में मिला। एक ओर जहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उन्हें पहचानने से इनकार कर रहे थे, वहीं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन कोरोना काल के दौरान पदस्थ नहीं होने का हवाला दे रहे थे। इस तरह अभ्यर्थी जिला अस्पताल व सीएमएचओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे थे, वही एक महिला अभ्यर्थी की तबीयत बिगड़ने लगी थी।
तरह-तरह बहाने कर जिला अस्पताल के चक्कर लगवाए
अभ्यर्थी संध्या देवांगन ने बताया कि बिना खाए पीये अनुभव प्रमाण पत्र के लिए देर रात तक सीएमएचओ कार्यालय में बैठे रहे। शाम करीब 7 बजे सीएमएचओ के द्वारा वेतन भुगतान को लेकर बैंक स्टेटमेंट माँगा गया, जबकि उनके विभाग की ओर से ही पे स्लीप जारी किया गया है, बतौर साक्ष्य उन्हें प्रस्तुत किया गया। इसी प्रकार सीएमएचओ ने अनुभव प्रमाण पत्र के लिए दिए आवेदन को सिविल सर्जन से फॉरवर्ड कर लाने को कहा इसके बाद अभ्यर्थी सिविल सर्जन के पास पहुंचे। फॉरवर्ड किया आवेदन को सीएमएचओ कार्यालय लेकर पहुंचने पर उपस्थित अधिकारी ने 2020 की उपस्थिति पंजी लाने को कहा। इसके बाद अभ्यर्थी आक्रोशित हो उठे, उन्होंने कहा कि जानबूझकर बार-बार जिला अस्पताल के चक्कर लगवाए जा रहे हैं।







